, , ,

दो युवतियां बनी पुरे देश के लिए मिशाल देखिये ऐसा क्या हुआ

बेंगलुरु
पेशे से सॉफ्टवेयर इंजिनियर मैयत्री मंजूनाथ रात 9.30 बजे अपने ऑफिस से घर पहुंची ही थीं कि उनके पड़ोस की दो लड़कियों ने उन्हें अपार्टमेंट परिसर के अंदर फुटपाथ पर एक नवजात बच्ची के पड़े होने के बारे में बताया। इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के पास बेहुर मेन रोड के पास स्थित कॉम्प्लेक्स में रहने वाली मैयत्री जब उस जगह पर पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि एक छोटी सी बच्ची जो कि कुछ घंटे पहले ही पैदा हुई थी, बिना कपड़ों के वहां पड़ी हुई है। बच्ची के शरीर से खून तक साफ नहीं किया गया था। उन्होंने उसी बिल्डिंग में रहने वाली अपना फ्रेंड सुषमा को फोन किया।
कुछ ही मिनटों में दोनों लड़कियों ने एक साफ कपड़े से बच्ची को साफ किया। उसके माता-पिता के बारे में पूछा लेकिन कुछ पता नहीं चला। उन्हें देखकर कुछ लोग और आ गए जिसे देखकर बच्ची रोने लगी। लोग बच्ची की तस्वीरें लेने लगे। बच्ची को लगातार रोते देखकर दोनों लड़कियां घबरा गईं। उन्होंने तुरंत 108 पर कॉल किया और ऐम्बुलेंस बुलाई और कुछ पास खड़े लोगों से साथ में हॉस्पिटल चलने को कहा। कोई आने को राजी नहीं हुआ।
45 मिनट बाद ऐम्बुलेंस आई और वे बच्ची को लेकर हॉस्पिटल पहुंचे। ऐम्बुलेंस उन्हें इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ हॉस्पिटल लेकर गई। जब तक उन्होंने बच्ची को ऐडमिट कराया 12.30 बज चुके थे।

बच्ची को हॉस्पिटल पहुंचाने के बाद उन्हें सिदापुरा पुलिस स्टेशन ले जाया गया जहां उन्होंने अपने स्टेटमेंट दिए। इसके बाद उन्हें इलेक्ट्रॉनिक सिटी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने को कहा गया। उन्होंने ये भी कर दिया।

घर लौटते समय उन्हें पुलिस का फोन आया। पुलिस ने बताया कि बच्ची की मां मिल गई है। पुलिस ने मैयत्री को बताया कि बच्ची की मां उनके अपार्टमेंट के सामने झुग्गी बस्ती में रहती है। उसने बताया कि उसे बच्चा नहीं चाहिए था इसलिए उसने अपार्टमेंट में उसे छोड़ दिया।

मैयत्री ने कहा, ‘पुलिस ने हमसे रिक्वेस्ट की कि हम उस महिला से बात करें और उसे अपना बच्चा पालने के लिए कहें। हम उस झुग्गी में गए जहां वह रहती थी, हम यह देखकर हैरान हो गए कि वह भागने की तैयारी कर रही थी। यह विश्वास करना बड़ा मुश्किल था कि उसने अभी-अभी बच्चे को जन्म दिया है। हमने उससे बात की लेकिन वह जैसे प्रण कर चुकी थी कि उसे बच्ची नहीं चाहिए।’

उन्हें पता चला कि महिला विधवा है और उसकी 16 साल की एक बेटी और 10 साल का बेटा है। गरीबी और समाज के डर से वह बच्चे को नहीं अपनाना चाहती थी। गर्भावस्था में अपने पेट के लिए उसने पड़ोसियों से कहा कि उसके पेट में ट्यूमर की वजह से सूजन है।

अगले दिन पुलिस महिला को हॉस्पटिल लेकर गई और उसे महिला के संरक्षण में छोड़ दिया। बच्ची का अब भी ट्रीटमेंट चल रहा है और वह खतरे से बाहर है। पुलिस ऑफिसर ने मैयत्री और सुषमा के प्रयासों की तारीफ की और कहा कि महिला बच्ची को पालने के लिए तैयार हो गई है इसलिए उसके खिलाफ कोई केस नहीं है।

February-05-2017

Expressbharat

 

 

Comments

comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

, ,
Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
%d bloggers like this: